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इस वर्ष भी विपक्ष पर भारी पड़ा मोदी का भगवा खेमा

वंशवाद के काऱण राजनेताओं की डूबी लुटिया अलविदा 2017 जगदीश यादव कोलकाता।यह साल मात्र कुछ दिनों का मेहमान है। इस वर्ष अगर देश ने कईयों को खोया है तो तमाम उपलब्धियां भी हासिल की है। लेकिन अगर हम बात देश के राजन...
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भाजपा के लिये मुकुल ‘फूल’ साबित होंगे या ‘भूल’

जगदीश यादव लेखक अभय बंग पत्रिका व अभयटीवी डॉट कम के सम्पादक हैं। संपर्क न. 09831952619/ 09804410919 मुकुल राय द्वारा भाजपा का दामन थामने के बाद से राज्य में एक बार फिर जन चर्चाओं का दौर शुरु हो गया है कि ह...
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‘हुकुम का इक्का’ साबित हो सकते हैं हुकुमदेव नारायण यादव

पीएम मोदी व साह फिर देश भर को चौका सकते हैं राजधानी में आज से अमित साह की खास बैठक जगदीश यादव नई दिल्ली। देश की राजधानी वैसे भी हर रोज राजनीति की नई इबारत लिखती है। लेकिन इन दिनों भाजपा नई दिल्ली में राजनीति...
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GST से डरने की जरुरत नहीं

संतोष कुमार संतोष कुमारबीजेपी (ट्रेड सेल) दक्षिण 24 परगना जिले के कन्वेनर हैं। जैसा की सबको पता है, और भारत सरकार टेलीविज़न और मीडिया के द्वारा जनहित में प्रचार कर रहे है, फिर भी कुछ लोग GST के लागू होने ...
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भारतीय रेल का एवरेस्ट : चेनाब पुल

सरोज सिंह लेखिका वरिष्ठ पत्रकार और लेख में  विचार उनके निजी हैं।   भारतीय रेलवे जल्द ही दुनिया में एक नया इतिहास रचने जा रहा है। जम्मू-कश्मीर के रियासी जिले में शिवालिक की ऊंची पहाड़ियों के बीच बहन...
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जरा याद करें भारत माता के अमर सपूत डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी को

वीरेन्द्र सिंह परिहार देश के उच्च कोटि के शिक्षा शास्त्री, देश की एकता और अखण्डता के संरक्षक, विभाजन के दंश से त्रस्त देशवासियों के तारणहार, राष्ट्रवादी विचारधारा से ओत-प्रोत, जनसंघ नामक‘ राजनीतिक पार्टी के सं...
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दिलीप घोष ने उठाया क्रिकेट में भारत की हार पर आतिशबाजी पर सवाल

कोलकाता/ नदिया। आखिर क्रिकेट में पाकिस्तान से भारत की हार के बाद इस राज्य के कई जगहों पर उल्लास क्यों देखा जाता है। उक्त सवाल हम नहीं उठा रहें हैं बरन उक्त सवाल प्रदेश भाजपा के अध्यक्ष दिलीप घोष ने उठाया। दिलीप...
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खबरों के खजाने का सूखाग्रस्त क्षेत्र  …!!

तारकेश कुमार ओझा लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं। ब्रेकिंग न्यूज... बड़ी खबर...। चैनलों पर इस तरह की झिलमिलाहट होते ही पता नहीं क्यों मेरे जेहन में कुछ खास परिघटनाएं ही उमड़ने - घुमड़ने लगती है। मुझे ल...
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दूर के रसगुल्ले , पास के गुलगुले …!!

लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं। तारकेश कुमार ओझा इसे जनसाधारण की बदनसीबी कहें या निराशावाद कि खबरों की आंधी में उड़ने वाले सूचनाओं के जो तिनके दूर से उन्हें रसगुल्ले जैसे प्रतीत होते हैं, वहीं नजदीक आने पर गुलगुल...
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फिर दीदी की ‘हसरतों की नाव’ दिल्ली की ओर

जगदीश यादव  कोलकाता। देश में राष्ट्रपति चुनाव की तारीख के करीब आते ही देश की राजनीति में  नये राजनीतिक समीकरण के रंग को मोदी सरकार के विरोधी गाढ़ा करने के लिये हर सम्बावित कोशिश में जुट गये हैं। वहीं भाजपा द्व...