कोलकाता। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वैज्ञानिकों से गरीबों तथा मध्यम वर्ग के जीवन में बदलाव के लिए काम करने की अपील करते हुये आज कहा कि नवाचार एवं अनुसंधान का उद्देश्य नये भारत का निर्माण होना चाहिए। श्री मोदी ने प्रसिद्ध वैज्ञानिक सत्येंद्र नाथ बोस की 125वीं जयंती समारोह की वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिये यहाँ शुरुआत करते हुये कहा,” विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में काम कर रहे हर व्यक्ति को अपने अनुसंधान एवं नवाचार का फोकस नवभारत के निर्माण पर रखना चाहिये। देश के वैज्ञानिक अपनी नूतन सोच के जरिये हमें रचनात्मक प्रौद्योगिकी समाधान प्रदान करते रहेंगे ताकि लोगों का जीवन आसान बन सके।” डॉ. बोस का जन्म एक जनवरी 1894 को हुआ था। क्वांटन मैकेनिक्स में उनके काम के लिए उन्हें याद किया जाता है। उनके अनुसंधान ने बोस-आइंस्टाइन स्टैटिस्टिक्स और बोस-आइंस्टाइन कंडेंसेट सिद्धांतों के लिए आधार का काम किया। जो कण बोस-आइंस्टाइन स्टैटिस्टिक्स के सिद्धांत के अनुसार व्यवहार करते हैं, उन्हें डॉ. बोस के सम्मान में बोसोन कण नाम दिया गया है जिन्हें ‘गॉड पार्टिकल’ के नाम से भी जाना जाता है। प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में कहा, ” सत्येंद्र नाथ बोस के जन्म के 125वें साल में हम एक साल तक चलने वाले समारोह की शुरुआत कर रहे हैं। मुझे उनके कार्यों के बारे में पता चला जो अपने समय और समाज से कहीं आगे थे। आचार्य एस.एन. बोस के जीवन और कार्यों से हम बहुत कुछ सीख सकते हैं। वह स्वयं अपने गुरू थे। अनुसंधान के लिए औपचारिक शिक्षा तथा वैश्विक वैज्ञानिक समुदाय से संपर्काभाव जैसी बाधाओं के बावजूद उन्होंने सफलता हासिल की।” उन्होंने विज्ञान को क्षेत्रीय तथा सरल भाषा में उपलब्ध कराने पर जोर देते हुये कहा, “युवाओं में विज्ञान की समझ तथा इसके प्रति प्रेम पैदा करने के लिए विज्ञान संचार को बड़े पैमाने पर प्रोत्साहित करना जरूरी है। इस काम में भाषा की भूमिका बाधक के रूप में नहीं, बल्कि सहायक के रूप में होनी चाहिये।”

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