ममता ने जताया जनता का आभार, कहा,
‘तीने- तीन, बीजेपी विदायी निन’

कोलकाता से फिरोज आलम व खड़गपुर से रौनक कुमार शंकर
कोलकाता। एक बार फिर बंगाल में ममता बनर्जी का जादू दिखा । राज्य में हुए विधानसभा उपचुनाव में सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस ने सभी तीनों सीटों पर जीत दर्ज की है। राज्य में लोकसभा चुनावों में शानदार प्रदर्शन करने वाली भाजपा इस उपचुनाव में एक भी सीट नहीं जीत पाई और उसे खड़गपुर सदर सीट का नुकसान उठाना पड़ा है। वहीं, राज्य की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने उपचुनाव में जीत के बाद कहा कि मतदाताओं ने भाजपा को उसके ‘‘सत्ता के अहंकार’’ के लिये सबक सिखाया है। इन सभी जगहों पर सोमवार को मतदान हुआ था। गुरुवार को आए विधानसभा उपचुनाव के नतीजों में तृणमूल कांग्रेस ने पश्चिम बंगाल की कालियागंज और खड़गपुर सदर और करीमपुर सीट पर जीत दर्ज की है। पश्चिम बंगाल में सबसे चौंकाने वाले परिणाम खड़गपुर सदर सीट से रहा है। इस साल हुए लोकसभा चुनाव में राज्य की 18 सीटें जीतने वाली भाजपा के विधानसभा उपचुनाव में उम्मीदवार प्रेमचंद्र झा को तृणमूल कांग्रेस के प्रदीप सरकार ने हराकर भगवा पार्टी से यह सीट छीन ली। निर्वाचन आयोग के अधिकारियों ने गुरुवार को बताया कि सरकार ने भाजपा उम्मीदवार को 20788 मतों के अंतर से हराया। खड़गपुर सदर सीट पर भाजपा की हार पार्टी के लिए एक झटका है जिसके प्रदेश अध्यक्ष दिलीप घोष मेदिनीपुर से लोकसभा चुनाव जीतने से पहले वहां से विधायक थे। खड़गपुर सदर मेदिनीपुर लोकसभा क्षेत्र के तहत आने वाला एक विधानसभा क्षेत्र है। तृणमूल कांग्रेस के उम्मीदवार बिमलेंदु सिन्हा रॉय ने अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी भाजपा उम्मीदवार जयप्रकाश मजूमदार को 24,073 मतों से हराकर करीमपुर विधानसभा सीट पर उपचुनाव जीता। उन्होंने इस सीट पर अपनी पार्टी का कब्जा बरकरार रखा। तृणमूल कांग्रेस की महुआ मोइत्रा ने पिछले विधानसभा चुनाव में करीमपुर सीट पर जीत दर्ज की थी, बाद में वह कृष्णानगर लोकसभा सीट से निर्वाचित हो गईं। तृणमूल कांग्रेस के तपन देव सिन्हा ने बेहद नजदीकी मुकाबले में कालियागंज सीट जीत ली है। उन्होंने अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी भाजपा के कमल चंद्र सरकार को 2418 वोटों से हराया। पिछले विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के परमथनाथ रॉय ने जीत दर्ज की थी। पार्टी ने उनकी पुत्री धृताश्री को मैदान में उतारा था जो इस उपचुनाव में तीसरे नम्बर पर रहीं। कालियागंज रायगंज लोकसभा क्षेत्र में तहत आने वाला एक विधानसभा क्षेत्र है जहां से भाजपा ने कुछ ही महीने पहले जीत दर्ज की थी। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने उपचुनाव में पार्टी की जीत का श्रेय राज्य की जनता को देते हुए कहा कि मतदाताओं ने भाजपा को उसके ‘‘सत्ता के अहंकार’’ के लिये सबक सिखाया है। उन्होंने कहा, ‘‘हम इस जीत को बंगाल के लोगों को समर्पित करते हैं। भाजपा को सत्ता के अहंकार और बंगाल के लोगों का अपमान करने के लिए सबक मिला है।’’ उन्होंने कहा कि माकपा और कांग्रेस स्वयं को मजबूत करने की बजाय भाजपा की पश्चिम बंगाल में ‘‘मदद’’ कर रही हैं। कालियागंज व खडग़पुर सदर सीट पर जीत तृणमूल के लिए बड़ी उपलब्धि है क्योंकि, अस्तित्व में आने के बाद से अब तक तृणमूल को यहां जीत नहीं मिली थी और यह जीत पार्टी को 21 साल बाद नसीब हुई है। इस जीत से गदगद तृणमूल प्रमुख व बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कहा कि यह ऐतिहासिक जनादेश है और जनता ने भाजपा के अहंकार को जवाब दिया है।सुश्री बनर्जी ने कहा कि मैं मां, माटी, मानुष के प्रति आभारी हूं, कतार में खड़ा होकर लोगों ने वोट दिया और यही लोकतंत्र की खूबसुरती है कि जनता का साथ सबको जवाब देता है। यह देश, जाति के नाम पर लोगों को बांटने वालों को करारा जवाब है जिसे वही महसूस कर सकता है जिसने जनता के हित में कोई उपलब्धि हासिल की हो।बता दें कि तीन विधानसभा सीटों पर 25 नवंबर को उपचुनाव हुए थे। खडग़पुर सदर और करीमपुर विधानसभा क्षेत्रों के विधायकों क्रमश: दिलीप घोष (भाजपा) और महुआ मोइत्रा (तृणमूल कांग्रेस) ने लोकसभा चुनाव लड़ उसमें जीत हासिल की थी, जिसके बाद ये सीटें खाली हो गईं थी। वहीं कालियागंज की सीट कांग्रेस विधायक प्रमथ नाथ राय के निधन के बाद खाली हो गई थी। लोकसभा चुनाव में भाजपा ने तृणमूल को लेकर नारा दिया था 19 में हाफ 21 साफ, इसी नारे को हथियार बनाते हुए ममता बनर्जी ने कहा कि वे 21 में साफ की बात कर रहे थे लेकिन तीन सीटों के उपचुनाव ने स्पष्ट कर दिया कि भाजपा 19 में ही साफ हो गई। सभी ने बढ़ चढ़ कर मतदान में हिस्सा लिया है, यह बड़ी बात है भले ही यह उपचुनाव ही क्यों न हो।इधर क्या भाजपा नेताओं द्वारा चुनाव प्रचार में राज्य में एनआरसी लागू करना का दंभ भरना हार की वजह रही? इस पर ममता बनर्जी ने कहा निश्चित तौर पर एनआरसी एक फैक्टर है लेकिन अलग-अलग सीटों के लिए अलग मुद्दे हमारी जीत की वजह बनी है। उन्होंने कहा कि बंगाल में सब को साथ लेकर चलने की संस्कृति रही है। खडग़पुर में विभिन्न भाषाओं के लोग रहते हैं, कालियागंज में मुस्लिम व हिन्दुओं की आबादी है, यहां राजवंशियों को अब यह समझ आ चुका है कि तृणमूल उनके साथ है। मुस्लिम, हिंदु सभी को यह समझ है कि विकास के साथ बंगाल समान संस्कृति को साथ लेकर चलने वाला है। बंगाल के लोगों को दूसरे राज्यों में मारा जा रहा है, बेरोजगारी बढ़ी है, आर्थिक स्थिति चौपट हो रही है ऐसे में जनता को तृणमूल ही विकल्प नजर आ रही है।

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