बदले मिजाज में देश में बंगाल सबसे आगे
धारा 370 हटते ही सपनों की खोज शुरु

जगदीश यादव
कोलकाता। कश्मीरी दुल्हन संबंधी बयान पर भले ही हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर की भद्द फिट गयी हो। लेकिन जम्मू कश्मीर में धारा 370 हटाए जाने पर देश भर में अब ऐसे परिवारों की संख्या कम नही है जो कश्मीरी दुल्हन अपने घर में लाना चाहते हैं। जी हां हैरत में रहने की कोई बात नही है बरन उक्त मामले में देश का मिजाज कुछ ऐसा ही बदला है। वैसे पश्चिम बंगाल उक्त मामले में देश में अब अन्य राज्यो से आगे है यहां तक की बंगाल ने इस मामले में दिल्ली को भी पीछे छोड़ दिया है। पड़ोसी देश बांग्लादेश के भी कई सम्भ्रांत परिवार अपने घर के लाडले के लिये कश्मीरी दुल्हन की इच्छा पाले हुए है। जम्मू कश्मीर में धारा 370 हटाए जाने के बाद से ही देश भर में बड़ी तेजी के साथ गुगल सर्च में कश्मीर में डल झील की तस्वीरों को देखने के बजाय, ‘मैरी कश्मीरी गर्ल’ सर्च किये जा रहे हैं। वैसे उक्त मामले में अबतक और दिल्ली सबसे ऊपर था। लेकिन अब पश्चिम बंगाल सबसे उपर है।खबर के अनुसार हैरत होगी की बांग्ला भाषा में उक्त विषय पर सर्च गुगल पर व्यापक तौर पर बढ़ गया है। इस मामले पर देश के राज्यों में दिल्ली दूसरे और तेलंगाना तीसरे स्थान पर है। कर्नाटक चौथे और महाराष्ट्र पांचवें स्थान पर है। इसी तर्ज पर बिहार, उत्तर प्रदेश, हिमाचल प्रदेश, हरियाणा आदि राज्यों से कश्मीरी दुल्हन की प्रति ललक बढ़ी है।उक्त मामले पर महानगर कोलकाता सहित सटे अंचलों में रिश्ते जोड़ने के काम में लगे कई मैरीज ब्यूरों से बात करने पर पता चलता है कि देश भर में लोगों की एक खास पसंद है कि उनके परिवार में भी कश्मीरी दुल्हन आये। एडवोकेट गीतिका अग्रवाल के मैरीज रजिस्ट्ररी का संचालन कर रहे दिनेश अग्रवाल ने बताया कि जम्मू कश्मीर में धारा 370 हटाए जाने पर देश भर में अब ऐसे परिवारों की संख्या कम नही है जो कश्मीरी दुल्हन अपने घर में लाना चाहते हैं। अग्रवाल ने बताया कि अभी एक मामला कश्मीरी मुस्लिम युवती का आया है जो कोलकाता के एक पंजाबी युवक से शादी करेगी। इसी तरह से तेजी के साथ यह पसंद एकदम खुल कर सामने आया है कि लोग कश्मीरी लड़कियों को अपना जीवन साथी बनाना चाहते है। लेकिन यह आज पीएम नरेन्द्र मोदी के आदम्य व कठोर फैसले के कारण सम्भव हो रहा है। वरना लोग व इस देश के तमाम परिवार कश्मीरी दुल्हन लाने का सपना तो देख लेते थें लेकिन तमाम कायदे कानून के कारण यह सम्भव नही हो पाता था।

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