रहस्य रोमांच कथा

जगदीश यादव
सुंदरबन का नाम भला कौन नहीं जानता है। अक्सर लोगों को यहां के जंगलों के बीच नदी नालों में केकड़ा व मछली पकड़ने गये मछुआरों को जंगल के उस्ताद कहे जाने वाले बाघ का शिकार होने की खबरे समाचार माध्यमों से मिलते ही रहती है। रहस्यों से भरे इस सुंदरबन के रहस्य के बारे एक जन्म में सब कुछ जानना सम्भव नही है। वर्ष 2002 में अपने एक पत्रकार दोस्त के साथ सुंदरबन में गया था। काफी रोमांचित था। सहजनखाली जगंल से सटे इलाके में हमलोगों ने डेरा जमाया। यहीं एक स्थानीय मछुआरे गोपाल दास ने हमे यह जानकारी दी थी कि उक्त जंगल क्षेत्र में एक बाघ की आत्मा अक्सर मछुआरों से बदला लेती है। उक्त मछुआरे की माने तो आज से लगभग 70-80 साल पहले कुछ मछुआरों ने क बाघ को पीट पीटकर मार डाला था। उक्त मछुआरे व स्थानीय लोगों ने बताया था कि उक्त बाघ की मौत के बाद से अक्सर रात को एक दैत्याकार बाघ बस्ती में अपने घर में सो रहे किसी भी मछुआरे को उठा ले जाता था। बाद में मछुआरे की लाश घने जंगलों से मिलती थी। तमाम मछुआरों ने विशेषकर अमवस्या की रात को दैत्याकार को देखने का दावा करते रहें है। उक्त मछुआरों की कही सुनी बातों के अनुसार दैत्याकार बाघ की लाल आंखे इस कदर जलती महसूस होती थी कि मानों लाल बल्व हों। पल भर में दैत्याकार बाघ अपने स्थान से गायब हो जाता था और फिर पल भर में प्रकट हो जाता था। दैत्याकार बाघ की आत्मा के आतंक का हाल तो यह था कि यहां के तमाम मछुआरे अपने हाथों में ओझा द्वारा दिये ताबीज को बांध कर रखते थें ताकि बाघ की आत्मा से उनका बचाव हो सके। कहा जाता है कि यहां के किसी बडे ओझा ने बताया था कि अगर उक्त लोग बनबीबी की विशेष पूजा कर बाघ की आत्मा से सामुहिक क्षमा मांगे तो बाघ की आत्मा से बचाव हो सकता है। कहा जाता है कि इस तरह के खतरों से सुरक्षा के लिए बनबीबी सदियों से पूजी जाती रही हैं। सुंदरबन के जंगलों दुर्गम इलाकों में वनदेवी बनबीबी के रुप में पूजीं जाती हैं। यह एक ऐसी देवी हैं जिसे हिंदु व मुसलमान सम्प्रदाय केलोग समान रुप से पूजते हैं और यह देवी इनके लिये खास हैं। फिर चाहे बंगाल में स्थित सुंदरबन का हिस्सा हो या फिर बांग्लादेश। हर जगह बनबीबी समान तौर पर वंदनीय हैं। मछुआरों की दावे को माने तो बनदेवी की विशेष पूजा व बाघ की कथित आत्मा से सामुहिक क्षमा याचना के बाद ही उक्त दैत्याकार बाघ की आत्मा का प्रकोप शांत हुआ लेकिन तमाम मछुआरे आज भी दैत्याकार बाघ की आत्मा को अक्सर देखने की बाते करते हैं। बहरहाल इस बारे में क्या सच है और क्या अफसाना यह तो हम नहीं कह सकते है।

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