जनमानस में वारदात को लेकर साजिश की बू

जगदीश यादव
कोलकाता।महानगर के बडा़बाजार का कलेजा निसंदेह काफी बड़ा है। एशिया के वृहत्तम बाजारों में अन्यतम बड़ाबाजार क्या एक बार फिर किसी साजिश का शिकार हुआ है। या फिर बागड़ी मार्केट की आग से जनमानस में साजिश की जो बू आ रही है वह महज भ्रम है या फिर हकिकत यह तो जांच का विषय है। लेकिन  सच कहे तो में शनिवार देर रात को बागड़ी मार्केट में लगी आग की घटना ने जनमानस के एक वर्ग को सोचने को मजबूर जरुर कर दिया है। बता दें कि  मनोहरदास कटरा, नंदराम मार्केट, स्ट्रांड रोड सहित सत्यनारायण मार्केट ही नही कई अगलगी की भीषण घटनाओं की याद एक बार फिर ताजा हो गयी। उक्त अगलगी की घटना ने जनमानस के एक वर्ग को सोचने को मजबूर कर दिया है कि आखिर छुट्टी के दिन या फिर छुट्टी के दिन से एक दिन पहले ही ज्यादातर आग अधिकांस घटनाएं बड़ाबाजार में क्यों घटती है। सवाल तो लाख टके है और इसका जवाब भी लोगों के सामने आना चाहिए। स्थानीय लोगों की माने तो बड़ाबाजार में अग्निकांड की सबसे अनोखी बात यही है कि यहां के बाजारों में जब भी आग लगती है तो दिन शनिवार या फिर रविवार होता है। होता है इसे संयोग कहे या फिर साजिश। साथ ही लगने वाली आग में सबकुछ जलकर खाक हो जाता है। फिर आरोप प्रत्यारोप से लेकर तमाम बातों का दौर चलता है और आग की घटनाएं वक्त के साथ ही भूल भूलैया के जल में ठण्डा हो जाती है। लोगों की माने तो घटना स्थल में वक्त के साथ ही  नया निर्माण होता है और प्रमोटरों की चांदी कट जाती है। मिली जानकारी पर भरोसा करे तो जिस जगह आग लगी उक्त बागरी मार्केट का मालिकाना को लेकर विवाद भी जारी था। बहरहाल जब तक अगलगी की घटना की उच्च स्तरीय जांच नहीं होती इसके बारे में कुछ भी कहना सिर्फ कायास या आरोप प्रत्यारोप ही कहे जा सकते हैं लेकिन इस बात को भी दावें के साथ नहीं कहा जा सकता है कि बागड़ी मार्केट साजिश का शिकार नहीं हुआ है।
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