मामले पर लिखा राष्ट्रपति व आईएससीए को पत्र

संतोष कुमार

कोलकाता। पंजाब के लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी में 106वीं भारतीय विज्ञान कांग्रेस (आईएससी-2019) में वैज्ञानिक ने न्यूटन और आइंस्टाइन को पूरी तरह गलत बताया है। वहीं गुरुत्वाकर्षण तरंगों का नाम नरेंद्र मोदी तरंगें किए जाने की भी बात कही गई है। इसके साथ-साथ रावण के समय श्रीलंका में एयरपोर्ट होने का दावा भी यहाँ किया गया है। विज्ञान कांग्रेस में वैज्ञानिकों के इस तरह के बयान की कड़ी आलोचना करते हुए भारतीय विज्ञान व युक्तिवादी समिति की ओर से देश के राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद को पत्र लिखकर वैज्ञानिकों के ऐसे अजीबोगरीब बयानों और दावों के खिलाफ कार्रवाई किये जाने की माँग की गयी है। समिति के पुरुलिया जिला सचिव मधुसूदन महतो ने इंडियन साइंस कांग्रेस असोसिएशन के महासचिव और कार्यकरी सचिव (कोलकाता) को भी पत्र लिखा है। महतो ने कहा कि सरकार द्वारा संचालित विज्ञान कांग्रेस में एक से बढ़कर एक वैज्ञानिक अवैज्ञानिक दावें कर रहे हैं उससे विश्‍व में भारत की विज्ञान आधारित छवि खराब हो रही है। इसलिए अजीबोगरीब दावे करने वाले वैज्ञानिकों को विज्ञान कांग्रेस से बाहर रखा जाये। साथ ही उन्हें ऐसे अवैज्ञानक बयान देने के लिए माफी माँगनी चाहिए। इसके लिए समिति की ओर से राष्ट्रपति को पत्र लिखा गया है। उल्लेखनीय है कि विज्ञान कांग्रेस में आंध्र यूनिवर्सिटी के कुलपति जी. नागेश्‍वर राव ने दावा किया कि रावण के पास 24 तरह के एयरक्राफ्ट थे और श्री लंका में उन दिनों एयरपोर्ट हुआ करते थे। वहीं तमिलनाडु के एक वैज्ञानिक के. जे. कृष्णन ने दावा किया कि न्यूटन और अल्बर्ट आइंस्टाइन की थिउरी पूरी तरह गलत थीं। उन्होंने दावा किया कि जल्द ही गुरुत्वाकर्षण तरंगों का नाम बदलकर ‘नरेंद्र मोदी तरंग’ रखा जाएगा। जबकि ङ्गिजिक्स में ग्रैविटेशनल लेंसिंग इङ्गेक्ट को ‘हर्षवर्धन इङ्गेक्ट’ के नाम से जाना जाएगा। हालांकि आंध्र यूनिवर्सिटी के वीसी के लेक्चर पर हैरानी जताते हुए इंडियन साइंस कांग्रेस असोसिएशन के अध्यक्ष मनोज कुमार चक्रवर्ती ने कहा, ‘मुझे गहरा खेद है उन्होंने जो बातें बच्चों के सामने रखीं। मैंने टीम को नजर रखने का निर्देश दिया था कि कोई भी अवैज्ञानिक दावा कोई स्पीकर ना करे। एक कुलपति के स्तर का व्यक्ति जब ऐसी बातें बोलता है तो हैरानी होती है।’ हालांकि बयान पर विवाद होने के बाद भी कुलपति जी नागेश्‍वर राव अपने बयान पर कायम रहे। उन्होंने दोहराया, ‘रामायण और महाभारत मिथ नहीं हैं, बल्कि इतिहास हैं।’ हम इनके बारे में जानते नहीं हैं तो इसका मतलब यह नहीं कि इसके पीछे विज्ञान नहीं था।’

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