फिरोज आलम

कोलकाता। राज्य सहित महानगर के विभिन्न शिवालयों में महाशिवरात्रि की तैयारी जोरों पर है। केवल शिव मंदिर ही नहीं बरन अन्य मंदिरों में भी साज-सज्जा की तैयारी की आज अंतिम चरण में दिखी। भूकैलाश गढ़,भूतनाथ मंदिर, मोटा महादेव, नकुलेश्वर महादेव सहित महानगर के तमाम शिव मंदिरों में शिवरात्रि को लेकर व्यस्तता का दौर चल रहा है। प्रसिद्ध भूतनाथ व भूकैलाश गढ़ मंदिरों को शिवरात्रि के लिये विशेष रूप से सजाया जाता है। bhuwnesh adv.उक्त मंदिरों में शिवरात्रि के अवसर पर शिव भक्तों का रेला उमड़ता है। महानगर ही नही बरना राज्य के तमाम जगहों से भक्तगण बड़ी संख्या में उक्त मंदिरों में पहुंचते हैं। ऐसे में मंदिर को आकर्षक ढंग से सजाया जा रहा है। राज्य के तमाम मंदिरों में इस दिन शिव विवाह का आयोजन होगा और महादेव के भक्त शिव बारात में भाग लेगें। इसके अलावा रात्रि में वैदिक मंत्रोच्चार के साथ शिव व पावर्ती का शुभ विवाह संपन्न किया जायेगा।राज्य के तमाम शिवमंदिरों में भजन से लेकर कई तरह के कार्यक्रमों का आयोजन भी होगा है। अगर बात एशिया महाद्वीप में वृहतम शिव लिंगों की करें तो महानगर कोलकता के खिदिरपुर अंचल में स्थित है भूकैलाश गढ़ का नाम भी आता है। कहते हैं कि आस्था के आगे हर चीज बौना नजर आता है। ऐसे में भूकैलाश गढ़ में देवों के देव महादेव शिव का निवास है।ऐसा उनके भक्तो का मानना भी है। कहते हैं कि यहां एकल काले पत्थरों से बना शिव लिंग है। वृहत्तम दो शिवलिंग भूकैलाश गढ़ के दो शिवमंदिरों में स्थापित है। 227 वर्ष प्राचीन इन शिवलिंगों को श्री रक्त कमलेश्वर और श्री कृष्ण चंद्रेश्वर के नाम से जाना जाता है। 1781 में निर्मित इन मंदिरों के परिसर में हर वर्ष शिवरात्रि के पावन अवसर पर एक भव्य मेले का आयोजन होता है। स्थानीय लोगों व दस्तावेजो से पता चलता है कि इन मंदिरों का निर्माण महाराज जयनारायण घोषाल ने कराया था।

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