दोनों राज्यों के अधिकारियों ने की बैठक

कोलकाता। मसानजोर डैम को लेकर झारखंड और पश्चिम बंगाल के बीच गहराते विवाद को दूर करने को लेकर दोनों राज्यों के वरीय पदाधिकारियों के बीच बातचीत शुरू हो गई है। बंगाल और झारखंड के अधिकारियों के बीच इस मसले का हल निकालने के लिए उपायुक्त कक्ष में करीब डेढ़ घंटे तक चली। बैठक में दोनों ने अपनी-अपनी भावनाओं से एक-दूसरे को अवगत कराया। मौके पर बंगाल के एडीएम रंजन झा बोले-जिन बिंदुओं को लेकर वार्ता हुई उसकी सारी जानकारी बीरभूम के डीएम को देंगे। इधर, दुमका के उपायुक्त मुकेश कुमार ने कहा कि सौहार्दपूर्ण माहौल में वार्ता हुई है। दोनों ने एक-दूसरे को अपनी भावना से अवगत कराया है। रंजन झा को जो बिंदु दिए गए हैं वे अपने डीएम के सामने रखेंगे। निकट भविष्य में अगर वहां की प्रशासन चाहे तो डीएम स्तर की बैठक होगी।उन्होंने कहा कि मसानजोर डैम मसले पर न तो सरकार और न ही प्रशासनिक स्तर पर किसी तरह का विवाद है। राजनीतिक दल को डैम के रंग और गेट को लेकर आपत्ति है। उन्होंने कहा कि सभी को संयम बरतने की आवश्यकता है। जल्द ही इस विवाद का समाधान निकल जाएगा। मौके पर डीडीसी वरुण रंजन भी मौजूद थे। बता दें कि पिछले दिनों समाज कल्याण मंत्री डॉ. लुईस मरांडी ने मसानजोर डैम का हो रहे रंग-रोगन के काम को रोक दिया था। वहीं मुख्य सड़क पर बंगाल सरकार द्वारा बनाए गए वेलकम गेट का भी विरोध कर रहे हैं। इसी मुद्दे पर झारखंड की मंत्री डॉ लुईस मरांडी ने ममता बनर्जी को हद नहीं पार करने की चेतावनी देते हुए कहा था कि मसानजोर डैम की तरफ जो कोई भी आंख उठाकर देखेगा उसकी आंख निकाल लेंगे। उन्होंने कहा था कि  बंगाल सरकार पहले एग्रीमेंट का डीड दिखाए फिर स्वामित्व का दावा करें। मसानजोर डैम को लेकर कई दिनों की चुप्पी के बाद झामुमो ने भाजपा पर प्रहार किया है। झामुमो ने कहा है कि बीजेपी का चरित्र जनता को बरगलाने का रही है जबकि उसे इसका समाधान करना चाहिए। झामुमो के दुमका जिलाध्यक्ष सुभाष सिंह ने बुधवार को कहा कि पार्टी मसानजोर सहित राज्य के विभिन्न सिंचाई परियोजनाओं के कारण विस्थापित लोगों के हक के लिए शुरू से ही संघर्ष करती रही है। पार्टी के सांसद और विधायक भी सदन में मसानजोर डैम की वजह से क्षेत्र के 144 मौजा के विस्थापितों के पुनर्वास के साथ डैम के एग्रीमेंट को जमीन पर उतारने की मांग करते रहे हैं। सुभाष सिंह ने कहा कि भाजपा दोनों राज्य के बीच कटुता पैदा कर वोट की राजनीति कर रही है। कहा कि भाजपा को मसानजोर डैम को लेकर दोनों राज्यों के बीच पूर्व में हुए एग्रीमेंट को सार्वजनिक करने का प्रयास करना चाहिए। जबकि 11 महीने के छोटे के कार्यकाल में हेमंत सोरेन की सरकार ने दोनों राज्यों के बीच आपसी वार्ता के माध्यम से मसानजोर डैम से सटे इलाके में रहने वाले लोगों के लिए पेयजल आपूर्ति योजना को कार्यान्वित किया था। लेकिन बाद में राज्य सरकार की उदासीनता की वजह से ट्रांसफार्मर और बिजली की व्यवस्था नहीं की गई। उन्होंने कहा कि ऐसे में राज्य की मंत्री डॉ लुईस मरांडी द्वारा मसानजोर गेट में झारखंड सरकार का लोगो लगाने और डैम का रंग रोगन किए जाने पर सवाल उठाना और पश्चिम बंगाल सरकार को आंख निकालने की धमकी देना दुर्भाग्यपूर्ण है।
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