ओडिशा में पुलिस महिलाओं से बर्बरता के साथ पेश आती है

भुवनेश्वर/कोलकाता। पंचायत चुनाव को लेकर बंगाल सरकार व राज्य चुनाव आयोग चाहे जितने भी दावे कर ले, लेकिन कथित कड़ी सुरक्षा व्यवस्था को लेकर इस बात की आशंका भी है कि इस मतदान के दौरान हिंसा व खून खराबे से इंकार नहीं किया जा सकता है। चुनाव से पहले ही राज्य नें चुनाव को लेकर काफी खून बहे है। उक्त बात आज प्रोटेक्शन फार डेमेक्रटिक ह्युमन राइटस ऑफ इंडिया के राष्ट्रीय कार्यकारिणी की एक सम्मेलन के बाद यहां मीडिया कर्मियों के साथ बातचीत में पीडीएचआरआई के अध्यक्ष डॉ. प्रदीप कुमार दुबे ने कही। उन्होंने कहा कि चुनाव कर्मियों से लेकर मतदाताओं व अन्य की सुरक्षा की जिम्मेवारी राज्य सरकार की है। पीडीएचआरआई के राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी जगदीश यादव व श्री दुबे ने मीडिया कर्मियों के सवालों के जवाब में कहा कि कलकत्ता हाईकोर्ट के उक्त निर्देश का हम स्वागत करते हैं जिसके तहत कोर्ट ने स्पष्ट कहा है कि चुनाव के दौरान यदि हिंसा या अशांति होती है तो उसका दायित्व राज्य के उन प्रशासनिक व पुलिस अधिकारियों पर होगी, जिन्होंने मतदान की सुरक्षा की रिपोर्ट अदालत को सौंपी है। खंडपीठ ने कहा कि यदि पंचायत चुनाव से अधिक ¨हिंसा हुई और जानमाल का नुकसान हुआ तो उसकी भरपाई रिपोर्ट सौंपने वाले अधिकारी अपनी जेब से करेंगे। उनके वेतन से भी भरपाई नहीं हुई तो उनकी संपत्ति जब्त की जाएगी और उससे भी क्षतिपूर्ति नहीं हुई तो राज्य सरकार को जिम्मेवारी लेनी होगी। उक्त अवसर पर पीडीएचआरआई के सचिव लिंगराज साहू ने कहा कि ओडिशा में आज स्थिति काफी अजीब हो गई है। यहां तेजी के साथ महिलाएं विभिन्न तरह के अपराधिक घटनाओं की शिकार हो रही है। इस राज्य में पुलिस भी महिलाओं के साथ बर्बरता के साथ पेश आती है जो जिससे मानवाधिकार का हनन हो रहा है। लिंगराज ने आरोप लगाते हुए कहा कि अभी हाल में ही यहां के थानों में पुलिस ने कई लड़कियों को जबरन पीटा और अशोभनिय हरकत के साथ पेश आये। आशा है कि इस राज्य के सीएम उक्त मामलों पर ध्यान देंगे। उक्त दौरान उपाध्यक्ष गदाधर दास, उप सचिव कमल पाण्डेय के अलावा मोहन माइती ने अपनी बात कही।

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