दिनेश मिश्र

खड़गपुर । पश्चिम बंगाल के जंगल महल के निवासियों की दास्तां भी अजीब है। माओवादी आतंक से मुक्ति के बावजूद हाथी समेत अन्य जंगली जानवरों का आतंक स्थानीय नागरिकों को खासा परेशान किए हुए है। हाथियों से खेतों की फसल के नुकसान के साथ ही इंसानी मौतें  जंगल महल में आम बात मानी जाती रही है। विषाक्त सांपों व अन्य जानवर भी लोगों को जब – तब निशाना बनाते रहते हैं।  अब भेड़िए के हमले में  हो रही मौत की घटनाओं  ने लोगों की नींद हराम कर दी है। बता दें कि बीते साल के अंतिम महीने की सर्दियों में झाड़ग्राम जिले के जामबनी प्रखंड में आग ताप रहे युवकों पर अज्ञात जानवर ने हमला कर दिया था। इस हमले में दो युवकों की जानें चली गई। दोनों की मौत लंबी चिकित्सा के दौरान हुई। पहले तो शासन समझ ही नहीं पाया कि हमला किस जानवर ने किया। काफी पड़ताल के बाद हमला  भेड़िए द्वारा किए जाने का अनुमान लगाया गया। इस घटना को अभी लोग भूल भी नहीं पाए थे कि विगत 14 फरवरी को झाड़ग्राम के अलग-अलग स्थानों पर हमला कर एक और भेड़िए ने दस लोगों को काट लिया । दूसरे दिन ग्रामीणों ने उक्त भेड़िए को पकड़ कर वन विभाग के सुपुर्द कर दिया था। हालांकि दूसरे दिन उसकी मौत हो गई थी। इसके बाद से ही पीड़ितों में भय व्याप्त होने लगा, क्योंकि जिला स्वास्थ्य विभाग के पास जंगली जानवरों के काटे से बचाव के लिए जरूरी वैक्सिन का घोर अभाव था। पिछले रविवार को कोलकाता स्थित अस्पताल में इलाज के दौरान सुशीला महतो की मौत हो गई थी। इस क्रम में भेड़िए के काटने से घायल भूषण चंद्र महतो (65) ने भी इलाज के दौरान कोलकाता स्थित अस्पताल में दम तोड़ दिया। वाकये से झाड़ग्राम के प्रभावित इलाकों में आतंक व्याप्त हो गया, क्योंकि अभी भी कई लोग उक्त भेड़िए के काटने से घायल हैं। दो की मौत की घटना से घायलों व उनके परिजनों में दहशत व्याप्त हो गई है। उन्हें डर है कि कहीं उनका हश्र भी सुशीला या भूषण जैसा न हो। वहीं शासकीय अधिकारी इस विषय पर कुछ कहने को तैयार नहीं है।

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