जवाब में मांगा, डांस फ्लोर पर उड़ने वाले धन का हिसाब

जगदीश यादव
कोलकाता। bar dance.jpg1देश में काला धन के खिलाफ प्रधानमंत्री कार्यालय से लेकर आम जन द्वारा एक मुहिम चल रही है। लेकिन सवाल लाख टके नहीं बरन उससे कही अधिक का है कि बारो में नाचने वाली बार गर्लों की अदा पर जिस तरह से नोट उड़ाये जा रहें है वह धन काला होता है या खून पसीने की कमाई?। क्या इन रुपयों का हिसाब सरकार के पास है?। उक्त तामम प्रश्नों के जवाब के लिये किये गये सूचना के अधिकार के तहत आरटीआई से हडडकंप मच गया है । जी हां उक्त आरटीआई दायर राज्य निवासी मा प्रोटेक्शन फार डेमोक्रेटिक ह्युमन राईट्स आफ इंडिया के कर्मी ललित शर्मा ने किया है। शर्मा व पीडीएचआरआई के पीडीएचआरआई के अध्यक्ष डॉ. प्रदीप कुमार दुबे के दावों की माने तो महानगर कोलकाता में कुकुरमुत्ते की तरह बार है। इनमे बार में थिरकने वालियों पर रुपये हवा में उड़ाये जाते हैं जिसका कोई हिसाब नही होता है। दुबे व शर्मा की माने तो ललित शर्मा ने मामले पर प्रधानमंत्री व वित्त मंत्रालय कार्यालय से सूचना के अधिकार के तहत जवाब मांगा तो पीएमओ ने वित्त मंत्रालय को मामले की कापी अग्रसित किया तो वहीं वित्त मंत्रालय ने मामले की कापी जवाब देने के लिये पश्चिम बंगाल के इंकमटैक्स विभाग को भेजा। लेकिन फिर भी पता नहीं चल सका इन विभागों के पास क्या बार गर्लों पर उड़ये जाने वाले पैसों का कोई हिसाब है। उक्त रुपये काले धन होते हैं या टैक्स चुकाया हुआ धऩ। दुबे व शर्मा की माने तो बार गर्लों पर हजारों करोड़ उड़ाये जाते है जिसका कोई हिसाब नहीं होता है। जबकि शराब से लेकर खाने पीने पर भी टैक्स व जीएसटी लगता है। बहरहाल देखना दिलचस्प होगा कि पश्चिम बंगाल के इंकमटैक्स विभाग द्वारा मामले में राज्य के जिलों व शहरी क्षेत्र के अधिकारियों से जो जवाब मांगी गई है उसेक स्वारुप क्या होता है। इस गंभीर मामले पर सरकारी तंत्र का रुख व कार्वाई क्या होती है। मुम्बई में बार गर्लों पर गाज गिर चुकी लेकिन बंगाल में क्या होता है।

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