मामले पर बंधी शिक्षा विभाग की घिग्घी
राज्य ने गठित की जांच कमेटी

कोलकाता। आखिर इसे क्या कहे अंधेर नगरी चौपट राजा या फिर इससे भी कुछ और ज्यादा। राज्य के नौनिहालों को शिक्षा की रौशनी प्रदान करने की जिम्मेदारी राज्य की जिश शिक्षा विभाग की है उसी ने खुदीराम बोस जैसे अमर शहीद क्रांतिकारी को आतंकवादी बना दिया गया है। राज्य सरकार की आठवीं की इतिहास की किताब में खुदीराम बोस को आतंकवादी बताया गया है।किताब का एक स्नैपशॉट फेसबुक, ट्विटर और अन्य सोशल साइट पर साझा किया जा रहा है। इसको लेकर माध्यमिक शिक्षा परिषद के वरिष्ठ अधिकारियों ने चुप्पी साध रखी है। बताया गया है कि इस आरोप में सच्चाई है। इसकी जांच के लिए राज्य सरकार ने इतिहासकार जीवन मुखर्जी के नेतृत्व में एक कमेटी गठित की है। इसमें हिंदू स्कूल और हेयर स्कूल के प्रधान शिक्षकों को रखा गया है।इसके अलावा शिक्षाविद पवित्र सरकार भी इस कमेटी का हिस्सा हैं। पूरी किताब की समीक्षा यह टीम करेगी और गलतियों को सुधार कर नए सिरे से प्रकाशन की अनुशंसा भी की जाएगी। मुख्य रूप से तीन बिंदुओं पर यह कमेटी काम करेगी। पहला पाठ्यक्रम में इस्तेमाल की गई भाषा सहज और समझ में आने लायक है कि नहीं। दूसरा पांचवीं श्रेणी से लेकर 12वीं तक कई नए पाठ्यक्रमों को शामिल किया गया है।इसमें सिंगूर आंदोलन से लेकर कई अन्य ऐसे आंदोलनों को इसमें शामिल किया गया है जिसकी नायिका ममता बनर्जी रही हैं। उस पाठ्यक्रम के तथ्यों की भी समीक्षा की जाएगी। इसके साथ आठवीं श्रेणी की इतिहास की किताब में खुदीराम बोस को आतंकवादी के तौर पर चिन्हित किया गया है। उसे भी सुधारने का उपाय तलाशा जाएगा।इतिहास की इस किताब को तैयार करने वाले शिक्षक निर्मल बनर्जी से आज जब इस बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि ब्रिटिश सरकार ने खुदीराम बोस को आतंकवादी कहा था। मैंने उसी तथ्य को लिखा है। मैं इतिहास से छेड़छाड़ नहीं कर सकता। उन्होंने कहा कि यह पढ़ाने वाले शिक्षकों का काम है कि बच्चों को आतंकवादियों और क्रांतिकारियों में अंतर समझाएं। राज्य शिक्षा विभाग का कहना है कि शिक्षा वर्ष 2020 से पहले इस भूल को सुधार पाना संभव नहीं हो सकेगा।उल्लेखनीय है कि इसके पहले फ्लाइंग सिख के नाम से विख्यात मिल्खा सिंह की जगह एक फिल्म में उनका किरदार निभाने वाले अभिनेता को ही किताब में मिल्खा सिंह बता दिया गया था। हालांकि, वह प्राइवेट किताब थी। इसके अलावा कई अन्य क्रांतिकारियों को भी इसी तरह से आतंकवादी के तौर पर स्कूलों की किताबों में चिन्हित किया गया है। आरोप लगता रहा है कि इतिहास लिखने वाले वामपंथी इतिहासकारों ने क्रांतिकारियों को अपमानित करने के लिए सोची-समझी साजिश के तहत इतिहास में आजादी के नायकों को गलत तरीके से परिभाषित किया है।

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