दिखने लगा राष्ट्रीय राजनीति में दीदी का जलवा

कोलकाता/चण्डीगढ़।  लगता है कि पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी  की नजर कहीं न कहीं दिल्ली की सियासत पर है। शायद यही कारण है कि वह राष्ट्रीय राजनीति में अपने प्यादों को सही जगह दिखा रही है ताकि वक्त की नजाकत के अनुसार सियासत की बाजी जीत सके।  ममता बनर्जी की कोशिश से कांग्रेस से निकाले गए व दो बार सांसद रह चुके जगमीत बराड़ के लोकहित अभियान और आम आदमी पार्टी का  सैद्धांतिक तौर पर गठबंधन हो गया। पिछले आठ महीनों से ‘आप’ में शामिल होने के लिए उतावले नजर रहे जगमीत बराड़ को लेने में आप दिलचस्पी नहीं दिखा रही थी जिसके चलते पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी ने उनका आप के साथ गठबंधन करवाने में अपनी भूमिका निभाई। ममता बनर्जी ने अरविंद केजरीवाल से बात करके इस गठबंधन के लिए राह तैयार की और बाकी का काम तृणमूल कांग्रेस के जनरल सेक्रेटरी मुकुल राय ने किया। ममता बनर्जी कू जगह कोई और होता तो केजरीवाल उसे दरकिनार कर देतें लेकिन वह दीदी को मना कैसे करतें।  खुद बराड़ इसकी पुष्टि करते हुए कहते हैं, सिंगूर की जमीन का फैसला आने पर उन्होंने ममता बनर्जी को फोन किया था तब उनसे मैंने अपने लोक हित अभियान और आप के साथ संपर्क की बात की। उन्होंने कहा, यह अच्छा गठबंधन हो सकता है तो दोनों लीडर्स की आपस में बात हुई और मुकुल राय का मुझे फोन गया। बराड़ ने कहा, इस गठबंधन का निशाना केवल 2017 नहीं बल्कि 2019 के लोकसभा चुनाव हैं जिसमें तृणमूल कांग्रेस और आम आदमी पार्टी गठजोड़ बना सकते हैं। अापके पंजाब मामलों के प्रभारी संजय सिंह ने कहा, यह पॉलिटिकल गठबंधन नहीं , सैद्धांतिक गठबंधन है। बराड़ बिना शर्त पार्टी में शामिल हुए हैं। बराड़ ने कहा कि वह चुनाव लड़ेंगे कि आप के लिए केवल प्रचार करेंगे, यह तय करना आप की लीडरशिप का काम है। आपमें शामिल होते ही अरविंद केजरीवाल को मसीहा बताते हुए उनकी तुलना बराड़ ने महात्मा गांधी से कर डाली। कहा, मैंने महात्मा गांधी को नहीं देखा लेकिन जैसे केजरीवाल काम करते हैं उसे देखकर लगता है कि वह आज के न्यू महात्मा गांधी हैं। बराड़ ने कहा, गठबंधन का निशाना केवल 2017 नहीं बल्कि 2019 के लोकसभा चुनाव हैं जिसमें तृणमूल कांग्रेस और आप गठजोड़ बना सकते हैं। जगमती के अभियान और आप का केवल मुद्दों के आधार पर गठबंधन हुआ है। उन्होंने कहा, वह आप में शामिल नहीं हो रहे हैं केवल मुद्दों पर समर्थन देंगे। आखिर यह दुविधा क्यों और किसको? दरअसल आप में सुच्चा सिंह छोटेपुर को निकालने और 32 टिकटों को देने के मामले में अपने वलंटियरो को दरकिनार दूसरी पार्टी के नेताओं को टिकटें देने से घमासान मचा हुआ है। लोगों के गुस्से को साइड ट्रैक करने के लिए ही वह मुद्दों के आधार पर समर्थन देने की बात कर रहे हैं। चूंकि जगह जगह से आप के नेताओं के इस्तीफे आने शुरू हो गए हैं ऐसे में बड़े कदम के नेताओं को पार्टी में लाकर आप यह संदेश भी देना चाहती है कि कुछ नेताओं के जाने से पार्टी के बिखरने की खबरें केवल मीडिया में हैं, जमीन पर इसका कोई आधार नहीं है।

खैर जो भी हो जगमीतबराड़ के आने से पार्टी में घमासान और बढ़ सकता है। उनके साथ तीन पूर्व विधायक रिपजीत बराड़, विजय साथी और तरसेम जोधां भी आप के समर्थन में आए हैं। बराड़ बड़े कदम के लीडर हैं, पार्टी के अन्य नेता उन्हें कैसे बर्दाश्त करेंगे, जब वह उनकी रैलियों में आकर भाषण देंगे तो कैसे कंट्रोल कर पाएंगे? क्या वह अपनी मर्जी से मुद्दों पर अपनी बात रख पाएंगे कि नहीं? कांग्रेस में रहकर हर मुद्दें पर खुलकर बोलने वाले सुखपाल खैहरा की बोलती पार्टी ने बंद कर रखी है, जिससे वह काफी घुटन महसूस कर रहे हैं।

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