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यादों के झरोखें में मनोहर आइच

कोलकाता। महानगर कोलकाता ही नही बरन देश के लोगों के लिये यह यह समाचार दुखद हो सकता है कि आजाद भारत में सबसे पहले मिस्टर यूनिवर्स का खिताब हासिल करने वाले मनोहर आइच का निधन हो गया । वह 103 वर्ष के थे और रविवार दोपहर लगभग ढाई बजे अपने निवास स्थान बागुईहाटी में उन्होंने आखरी सांस ली।  1952 में मनोहर आइच, स्वतंत्र भारत में पहली बार मिस्टर यूनिवर्स बने थे। चार फुट 11 इंच की लंबाई वाले मनोहर आइच को पॉकेट हरक्यूलिस भी कहा जाता था

950 में मनोहर आइच ने मिस्टर हरक्यूलिस का खिताब जीता।  तब उनकी उम्र 38 थी. उस वर्ष वह मिस्टर यूनिवर्स प्रतियोगिता में दूसरे स्थान पर रहे थे।  लेकिन लंदन में ट्रेनिंग लेकर 1952 में पहली बार मिस्टर यूनिवर्स बने। 1955  व 1960 में वह मिस्टर यूनिवर्स प्रतियोगिता में तृतीय व पांचवें स्थान पर रह कर दुनिया को अपने फन का कायल भी बनाया।  वह  विश्व चैंपियनशिप में स्प्रिंग पुलिंग में भी विजेता हुए।

1951, 1954 व 1958 एशियन गेम्स में उन्हें स्वर्ण पदक मिला।  इसके बाद से वह युवा बॉडी बिल्डर को दिशानिर्देश देते रहे।  मनोहर आइच के निधन से खेल जगत में शोक की लहर फैल गई है। राज्य के खेल राज्य मंत्री लक्ष्मीरतन शुक्ला ने उनके घर जाकर श्रद्धांजलि अर्पित किया।

1942 में ब्रिटिश सेना में रॉयल एयर फोर्स में वह शामिल हुए थे।  लेकिन एक ब्रिटिश अधिकारी को थप्पड़ मारने पर उन्हें जेल हो गयी थी।  लेकिन जेल में भी वह नियमित तौर पर व्यायाम करते थे।  जेलर ने इसपर खुश होकर खाने के लिए विशेष भोजन देने का प्रबंध किया । पीसी सरकार सीनियर जादू का शो करते और श्री आइच बॉडी बिल्डिंग की नुमाइश करते. उस शो का नाम फिजिक एंड मैजिक था। एशियन गेम्स में तीन बार स्वर्ण पदक जीतने वाले आइच का जन्म  1914 के 17 मार्च को मौजूदा बांग्लादेश के कुमिल्ला धामटी गांव में हुआ था।

 

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