डॉ. रमेश रजक

कोलकाता। हर पांच मिनट में भारत में और अमेरिका में हर घंटे ओरल कैंसर से एक व्यक्ति की मौत होती है। ऐसे में ओरल कैंसर एक बड़ी समस्या बन गया है। उक्त बात आज जीएनआईडीएसआर के डिप्टी डायरेक्टर व इंचार्ज प्रो. डॉ. आर.आर पाल  ने कही। वह जेआईएस ग्रुप के जीएनआईडीएसआर कोलकाता, आईआईटी खड़गपुर व आईआईइएसटी शिवपुर के एक सेमिनार में बोल रहें थें।  उन्होंने यह भी कहा कि वैसे उक्त रोग के प्राथमिक शुरुआत में इलाज सम्भव है। उक्त रोग के होने से पहले प्राथमिक तौर पर उक्त रोग के प्राथमिक लक्षण नजर आते हैं। आज लोग गुटका, तम्बकू सह ध्रूमपान जैसे व्यसनों के आदी हैं जो ओरल कैंसर का कारण होता है। उक्त रोग के कुछ प्राथमिक लक्षणों के बाद जो लक्षण प्रकट होते हैं उसे चिन्हित करने के लिये एक व्यापक ही नहीं बरन एक खास और समर्पित अवेंषन की आवश्यकता है जो केवल मेडिकल रिचर्स से ही सम्भव नहीं है। बयो इंजिनीयरिंग,स्टेम सेल, टीस्यू इंजिनीयरिंग, बायो सेंसर द्वारा उक्त रोग में रिचर्स की जरुरत होती है। सिर्फ मेडिकल द्वारा उक्त रोग का इलाज सम्भव नहीं है ऐसे में उक्त पद्धतियों को साथ लेकर रिचर्स से ही ओरल कैंसर से मुकाबला सम्भव हो सकता है।

इधर सेमिनार में मुख्य अतिथि व वेस्ट बंगाल मेडिकल सार्विस की चेयरपर्सन चंद्रिमा भट्टाचार्य ने कहा कि राज्य में अब चिकित्सा काफी बेहतर और अच्छा हो गया है। स्वास्थ्य के क्षेत्र में लोगों का विश्वास सरकार के स्वास्थ्य व्यवस्था पर बढ़ा है। चंद्रिमा भट्टाचार्य ने कहा कि स्वास्थ्य सेवा के क्षेत्र में सरकारी व गैर सरकारी संस्थानों द्वारा संयुक्त तौर पर काम किया जा रहा है और उससे लोगों का विश्वास और गहरा हो रहा है। एक प्रश्न के उत्तर में  उन्होंने कहा कि भारत में लगभग 25 लाख लोग मुंह के कैंसर से पीड़ित हैं लेकिन बंगाल के बारे में फिलहाल आंकड़ा उनके पास नहीं है।  इस दौरान जेआईएस ग्रुप के प्रबंध निदेशक सरदार तरनजीत सिंह सह डॉ. एस के भट्टाचार्या, डीसीआई के अध्यक्ष डॉ दिव्येन्दु मजूमदार, डॉ. सुरंजन दास व अन्य उपस्थित रहें।

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