जीटीए क्षेत्र में केन्द्रीय विश्वविद्यालय के लिये भी हुआ विचार-विमर्श

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जगदीश यादव

कोलकाता/नईदिल्ली। नोटबंदी को लेकर पीएम मोदी को आड़े हाथ लेने की कोशिश में लगी पं. बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के लिये एक सम्भावित परेशानी और बढ़ गई है। कारण केन्द्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने गोरखालैंड क्षेत्रीय प्रशासन के प्रतिनिधियों के साथ एक बैठक की अध्यक्षता की।  बैठक में केन्द्रीय जनजातीय कार्य मंत्री जुएल ओराम से लेकर  केन्द्रीय कृषि एवं किसान कल्याण और संसदीय कार्य राज्य मंत्री  एस.एस. आहलुवालिया, गृह मंत्रालय, मानव संसाधन विकास मंत्रालय तथा पंचायती राज मंत्रालय के कई वरिष्ठ अधिकारी ही नहीं मौजूद वरन गोरखा जनमुक्ति मोर्चा के शिर्ष नेता बिमल गुरुंग व रौशन गिरी भी मौजूद थे। ऐसे में राजनीति के जानकार मानकर चल रहें हैं कि हो सकता है कि दिल्ली की इस बैठक का असर एक बार फिर पहाड़ में दिखेगा और ममता बनर्जी के सामने फिर गोरखालैंड को लेकर कई चुनौतियां खड़ी हो।  गृह मंत्रालय सूत्रों के अनुसार बैठक के दौरान यह निर्णय लिया गया कि गोरखा, आदिवासी एवं दार्जिलिंग ज़िला और डू्अर क्षेत्र के लोगों की लंबित मांगों का सहानुभूतिक रूप से निरीक्षण कर उन पर उचित विचार किया जाएगा। 11 गोरखा समुदायों को अनुसूचित जनजाति का दर्ज़ा प्रदान किए जाने के संबंध में, जनजातीय कार्य मंत्री ने बताया कि इस संबंध में विचार-विमर्श करने के लिए जिस समिति का गठन किया गया था, उसे हाल ही में चार महीनों के लिए आगे बढ़ा दिया गया है। समिति को निर्देशित किया जाएगा कि वे निर्धारित समय में अपनी रिपोर्ट मंत्रालय को सौंपे। गोरखालैंड क्षेत्रीय प्रशासन अर्थात जीटीए क्षेत्र में केन्द्रीय विश्वविद्यालय की स्थापना किए जाने के संबंध में विचार-विमर्श किया गया कि प्रत्येक राज्य में केन्द्रीय विश्वविद्यालय स्थापित किए जाने को लेकर सामान्य तौर पर जनादेश प्राप्त है। हालांकि इस संबंध में कुछ अपवाद भी हो सकते हैं, इसी क्रम में यह निर्णय लिया गया कि जीटीए क्षेत्र में केन्द्रीय विश्वविद्यालय स्थापित किए जाने संबंधी मांग पर विचार किया जाएगा। जीटीए क्षेत्र में त्रिस्तरीय पंचायती राज व्यवस्था पुनः बहाल करने के संबंध में पंचायती राज मंत्रालय इस पूरे मामले का विश्लेषण कर रहा है और इसकी संभावनाएं तलाश रहा है। जहां तक 600 करोड़ रुपये की केन्द्रीय वित्तीय सहायता का संबंध है, जीटीए को 465 करोड़ रुपये पहले ही जारी किए जा चुके हैं, और शेष 135 करोड़ रुपयों के संबंध में आवंटन की प्रक्रिया पूरी की जा चुकी है, और वर्तमान वित्त वर्ष में इस धनराशि को भी जारी कर दिया जाएगा। बहहाल जो भी हो लेकिन राजनीति के जानकारों का कयास है कि बिमल गुरुंग और रौशन गिरी का केन्द्र सरकार के करीब जाना राज्य की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के लिये अच्छा तो नहीं होगा बरन पहाड़ के दोनों हस्ती गोरखा को लेकर राज्य की सीएम के आंखों की किरकिरी बने ही रहेंगे। अब सवाल उठ रहा है कि देखना है कि दीदी आंखों के इस किरकिरी के लिये राजनीति का कौन सा गुलाबजल ईजाद करती है।

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