पश्चिम मेदिनीपुर। कभी वृहत्तर जंगल महल  माओवादियों के कारण थरथराता था लेकिन इनके लगातार दमन से जंगल महल में काफी परिवर्तन देखा जा रहा था। लेकिन अब  पिछले कुछ दिनों से राज्य में माओवादियों के फिर से सक्रिय होने के संकेत मिल रहे थे। इस बाबत सुरक्षा एजेंसियों ने राज्य सरकार की पुलिस को बार-बार आगाह भी किया था और सुरक्षा एजेंसियों की आशंका तब सच हो गई जब पश्चिम मेदिनीपुर से मंगलवार को माओवादी होने के संदेह में चार लोगों को पुलिस ने गिरफ्तार किया। प्राप्त जानकारी के अनुसार आरोपितों के नाम सब्यसाची गोस्वामी, संजीव मजूमदार, प्रदीप गोस्वामी और टीपू सुल्तान हैं। बुधवार को पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि गुप्त सूचना के आधार पर कांजिमकाली फुटबॉल ग्राउंड के नजदीक के जंगलों से इन चारों माओवादियों को गिरफ्तार किया गया। गोयलतोड़ थाने की पुलिस ने जंगल को चारों तरफ से घेर लिया और तलाशी अभियान शुरू की। इस दौरान चारों माओवादी पकड़े गये। आरोपितों के पास से माओवादी पोस्टर सहित कई जरूरी दस्तावेज पुलिस ने बरामद किये हैं। उल्लेखनीय है गत अगस्त के महीने में सीआईडी ने आसनसोल से बिहार के मोस्ट वांटेड माओवादी टाइगर को गिरफ्तार किया था। राज्य की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भी कहा था भांगड़ में पावर ग्रिड आंदोलन के पीछे माओवादियों का हाथ था। माओवादी नेता किशन के मौत के बाद जंगलमहल में माओवादियों की पैठ बहुत कम हो गयी थी। लेकिन अब माओवादी जंगलमहल में पुनः अपनी खोई जमीन को तैयार करने में लगे हैं। बताते चलें कि आईएस, तालिबान और अल कायदा की तरह आतंकवादी संगठनों के बाद विश्व की सब चतुर्थ सबसे बड़ी उग्रवादी संगठन माओवादियों का हैं। भारत के तकरीबन 53 प्रतिशत हमलों में माओवादियों का हाथ रहता है। कुछ दिन पहले ही अमेरिका ने अपनी रिपोर्ट में इस बात का खुलासा किया था। रिपोर्ट में कहा गया था कि भारत में होने वाले 53 प्रतिशत आतंकवादी हमलों में माओवादियों का हाथ रहता है। उल्लेखनीय है कि वर्ष 2016 की तुलना में वर्ष 2017 में माओवादी हमलों की संख्या कम हुई है। वर्ष 2018 में माओवादी हमलों की संख्या 338 थी जबकि वर्ष 2017 में यह संख्या कम होकर 295 रह गयी। हालांकि माओवादी हमलों की संख्या जरूर कम हुई है लेकिन इन हमलों मे होने वाले मौतों की संख्या 16 फीसदी बढ़ गयी है। घायलों की संख्या भी 50 प्रतिशत तक इजाफा हुआ है।
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