कोलकाता। तृणमूल कांग्रेस की प्रमुख और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की सक्रियता और उनकी गतिविधियों को बहुत बारीकी से देखा जा रहा है। कांग्रेस की नजर उस पर है तो भाजपा की भी नजर है। तभी तृणमूल के कई नेता आशंकित हैं। उनको लग रहा है कि ममता बनर्जी की ज्यादा सक्रियता उनके नेताओं को मुश्किल में डाल सकती है। हालांकि कुछ नेताओं ने यह भी कहा कि अगर ममता बनर्जी कांग्रेस से दूरी रख कर कोई तीसरा मोर्चा बनाने की राजनीति करती हैं तो भाजपा को इससे दिक्कत नहीं है। बहरहाल, जो भी हो इस समय तृणमूल के कई नेता परेशान हैं। उसका एक कारण यह भी बताया जा रहा है कि त्रिपुरा में मिली जीत के बाद भाजपा का लक्ष्य राज्य में जीत हासिल करने का है। इसके लिए पार्टी ने तैयारी तेज कर दी है। इसके लिए एक तरफ भाजपा संगठन को मजबूत करने का प्रयास होगा, जिसके लिए मुकुल रॉय काम कर रहे हैं तो दूसरी ओर यह संभव है कि अलग अलग घोटालों में फंसे तृणमूल नेताओं पर कार्रवाई तेज हो ताकि भाजपा भ्रष्टाचार को मुद्दा बना सके। तृणमूल के जानकार नेताओं के मुताबिक आधा दर्जन नेताओं पर एजेंसियों की नजर है। ममता बनर्जी के करीबी नेता फिरहाद हाकिम उर्फ बॉबी हाकिम निशाने पर आ सकते हैं। उनको ममता बनर्जी की सबसे बड़ी ताकत कहा जा रहा है। उनके अलावा पहले से घोटालों में आरोपी पार्था चटर्जी और कुणाल घोष के लिए मुश्किलें बढ़ सकती हैं। ममता ने इसी वजह से इस बार कुणाल घोष को राज्यसभा में नहीं भेजा। उनके एक और मुस्लिम राज्यसभा सांसद की मुश्किलें बढ़ने के कयास लगाए जा रहे हैं और इनके अलावा अरुप बिस्वास की भी मुश्किल बढ़ सकती है।

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