राज्य में पीडि़त पुरुषों के लिये मुहिम

जगदीश यादव
कोलकाता। आमतौर पर देश में महिलाओं पुरुषों द्वारा उत्पीड़न की घटनाएं खबरों की सुर्खियां बनती रहती है। लेकिन इस देश में अब एक ऐसा वर्ग है जिसका मानना है कि कई भारतीय क़ानून महिलाओं के हक़ में हैं, इसलिए पुरुषों की सुनवाई नहीं होती। ये वर्ग अब महिला आयोग की तर्ज़ पर ‘पुुरुष आयोग की मांग कर रहा है। इस राज्य से भी एक बार तेजी के साथ पुरुष आयोग की गठन की मांग उठ रही है। अभिजान वेलफेयर एण्ड चैरिटेबल ट्रस्ट के बैनर तले अब उक्त मांग की जा रही है। अभिजान के संस्थापक व चेयरमैन गौरव राय ने आज बताया कि संस्था देश भर से लोगों को जोड़ रही है और महिलाओं द्वारा सताये लोगों के हक व हीत के लिये हम अपनी लड़ई लड़ रहे हैं। गौरव राय ने बताया कि भारतीय दंड संहिता की धारा 498ए के दुरुपयोग को रोकने के लिए उसमें संशोधन की आवश्यकता है। देश में महिला द्वावा पुरुषों की उत्पीड़िन के आंकड़ों की बात करे तो किसी को भी हैरत हो सकती है। वर्ष 2013 की बात करे तो दिल्ली मे महिला आयोग से जो आंकड़े आए वो हैरान करने वाले थे। रिपोर्ट के मुताबिक अप्रैल 2013 से जुलाई 2014 के बीच दर्ज हुए 2753 मामलों में 1287 ही सही पाए गए जबकि 1464 केस झूठे और तथ्यहीन थे। राय ने बताया कि ने बताया कि देश भर में पुरुषों के खिलाफ कई झूठे मामले दर्ज हो रहे हैं। राय का मानना है कि दहेज उत्पीड़न, यौन शोषण, दुष्कर्म जैसे मामलों में झूठे केस बनाकर फंसाए जाने के कारण देश में पुरुष लगातार आत्महत्या कर रहे हैं। देश में पुरुष आयोग न होने के कारण ऐसे मामलों में फंसे पुरुष अपनी पीड़ा भी किसी को बता नहीं पा रहे हैं। एक तरफा कानून के चलते पुरुष जेल और कोर्ट के चक्कर में फंसा रहता है।ऐसे में पुरुष आयोग की स्थापना करना समय की मांग है और यह होना ही चाहिए। अभिजान के द्वारा इसी माह 13 जुलाई को महानगर कोलकाता स्थित कलकत्ता प्रेस क्लब के पास से एक रैली का आयोजन होगा जिसमें देश भर से पुरुष आयोग के समर्थक अपनी आवाज के बुलंद करेगें। वैसे बता दे कि इस मामले में एक बड़ी सच्चाई यह है कि हमारे देश में अभी तक ऐसा कोई अधिकारिक तौर पर सरकारी अध्ययन या सरकारी सर्वेक्षण नहीं हुआ है, जो यह पता लगाए कि मर्द भी घरेलू हिंसा के शिकार होते हैं। बहरहाल हमारे देश में सदियों से एक परिपाटी के रूप में महिलाएं हर स्तर पर पुरुषों के मुकाबले कई तरह की प्रताड़नाएं झेलती रही हैं, लेकिन ऐसी समस्याएं कुछ पुरुषों की भी हो सकती हैं और इस बारे में भी अब विचार की जरूरत बनती है।

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